परिसर

क्षितिज से निकलती हुई सूर्य की किरणें जब सिल्वर प्लेट लेटर्स पर पड़ती है तब वह नीले बोर्ड में श्वेत अक्षरों से अंकित “भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भुवनेश्वर” के नाम की प्रतिष्ठा को प्रदर्शित करता है और ठीक उसके पीछे स्थित शैक्षणिक भवन अपनी प्रबुद्धता का परिचय देता है। संस्थान की स्थापना 22 जुलाई 2008 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर के परामर्श के अधीन हुई। एक वर्ष पूरे होने के ठीक बाद ही संस्थान ने अपने पारगमन परिसर सामंतपुरी भुवनेश्वर से कार्य करना प्रारंभ किया।

इतने अल्पकाल में ही संस्थान ने अर्थपूर्ण ढंग से सभी क्षेत्रों में प्रगति की है। संस्थान का स्थाई परिसर अरुगुल की 935 एकड़ की भूमि पर निर्मित होने जा रहा है। जो शहर से 20 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। इन संघर्षों के बावजूद भी संस्थान अपने छात्रों को सुविधा प्रदान करने में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रखता है। निपुण प्राध्यापकों, उत्साहपूर्ण छात्रों एवं समर्थक कर्मचारियों के दलों ने भा.प्रौ.सं.भुवनेश्वर को भविष्य का एक आशाजनक संस्थान बनाने के लक्ष्य को पुष्ट किया है। केंद्रीय उपकरण कक्ष एवं प्रशिक्षण केंद्र भुवनेश्वर की सहायता से संस्थान के पास सभी शैक्षणिक प्रयासों को पूरा करने के लिए संपूर्ण व्यवस्था उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त आधुनिक प्रौद्योगिकी युक्त विडियो सम्मेलन कक्ष के माध्यम से अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के प्राध्यापकगण एवं संस्थान छात्रों के बीच संवादमूलक शिक्षण की चर्चाओं को सुनिश्चिधत किया जाता है। विभिन्न प्रकार के पुस्तकों, पत्रिकाओं, समाचार पत्रों, विश्वकोशों आदि का संग्रह पुस्तकालय में है जो उसे शैक्षणिक वातावरण को हर क्षेत्र में संपूर्ण बनाती है। संस्थान में विभिन्न विषयों पर आयोजित साप्ताहिक अतिथि व्याख्यान इस तथ्य को पुष्टि प्रदान करता है कि छात्रगण संस्थान में अपने आवास के दौरान अधिक से अधिक ज्ञान अर्जित करते है। भा.प्रौ.सं. भुवनेश्वर अपनी सफलता और आदर्श लोक के निर्माण की ओर धीरे-धीरे अग्रसर हो रहा है।