निदेशक का प्रोफाइल

प्रो. आर. वी. राज कुमार
निदेशक एवं प्राध्यापक (विद्युत विज्ञान)
ई-मेल (का.) director@iitbbs.ac.in
ई-मेल (व्य.) rkumar@iitbbs.ac.in
दूरभाष 0674 2570334
फैक्स 0674 2576004
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Director

प्रो. रत्नम वी. राज कुमार का जन्म चिन्नापुरम (मछलीपत्तनम), आंध्र प्रदेश, भारत में हुआ । आपने 1980 में आंध्र प्रदेश विश्वविद्यालय, विशाखापत्तनम से बीई की डिग्री में संयुक्त तौर पर सभी शाखाओं में प्रथम स्थान हासिल की। आपने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्यूनिकेशन अभियांत्रिकी में एम. टेक. व पीएच.डी. की डिग्री क्रमश: 1982 व 1987 में आईआईटी खड़गपुर से हासिल की। आपने आईआईटी खड़गपुर में बतौर प्राध्यापक अपनी सेवा दी। वर्ष 1984 में युवाकाल में ही संकाय सदस्य के तौर पर आपका चयन आईआईटी खड़गपुर में हो गया। संप्रति आप आईआईटी भुवनेश्वर के निदेशक के तौर पर कार्यरत हैं। आप आईआईटी भुवनेश्वर को वैश्विक स्तर के संस्थानों में शुमार करना चाहते हैं। इससे पूर्व आप वर्ष 2010-15 के दौरान राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ नॉलेज टेक्नोलॉजी, हैदराबाद के प्रथम कुलपति रहे हैं। यहां आपने कई चुनौतियों का सामना किया और इस नए विश्वविद्यालय को गुणात्मक अभियांत्रिकी शिक्षा संस्थान के तौर पर परिणत किया। वार्षिक तौर पर 6000 ग्रामीण छात्रों की प्रवेश क्षमता वाले इस विश्वविद्यालय में आपने कई बदलाव स्थापित किए तथा यहां विश्व स्तरीय प्रयोगशालाएं स्थापित की। आपके नायकत्व में स्थापित आईसीटी आधारित शिक्षा तथा शैक्षणिक पद्धति हेतु विश्वविद्यालय को पुरस्कार भी मिले। आप आईआईटी खड़गपुर में वर्ष 2003 से 2006 तक संकायाध्यक्ष – शैक्षिक भी रहे हैं। अपनी अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के बावजूद आप जीएस सान्याल स्कूल ऑफ टेलीकम्यूनिकेशंस जो कि वर्ष 2005 तक टेलीकम्यूनिकेशन के क्षेत्र में शोध हेतु उत्कृष्ट संस्थान रहा उसके अध्यक्ष भी रहे हैं तथा वर्ष 2007-2010 तक वोडाफोन एस्सार-आईआईटी सेंटर ऑफ एक्सेलेंस इन टेलीकम्यूनिकेशंस के अध्यक्ष रहे हैं। आपके पास आईआईटी भुवनेश्वर तथा खड़गपुर के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण भावी योजनाएं हैं तथा आपने इन संस्थानों में कई महत्वपूर्ण अकादमिक सुधार भी किए हैं। आपने वर्ष 1988 में मिशीगन विश्वविद्यायल, एन्न अर्बोर में विजिटिंग एसाइनमेंट के तौर पर कार्य किया है। आप देश के कई प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों के शासकीय मंडल, सलाहकार परिषद तथा राष्ट्रीय समिति में अपनी सेवा दे चुके हैं तथा आपके विचार से इन संस्थानों को काफी लाभ हुआ है। आप इंडेस्ट कंसोर्टियम के प्रारंभक रहे हैं। आपका शोध विषय – डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग, वायरलेस कम्यूनिकेशंस, डिटेक्शन एंड एंड इस्टिमेशन एंड वीएलएसआई सिस्टम्स फॉर कम्यूनिकेशंस रहा है। अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं सम्मेलनों में आपका 160 शोध पत्र प्रकाशित हो चुका है तथा आप विभिन्न स्तरों पर 140 छात्रों के शोध निर्देशक रह चुके हैं। आप अभियांत्रिकी के वीडियो पाठ्यक्रम के लेखक रह चुके हैं जिसमें से एक जोड़ी कार्यक्रम का राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारण भी हो चुका है। संप्रति, आप ग्रीन रेडियो, कॉग्निटिव रेडियो तथा जीएलआरटी आधारित अनुसंधान पद्धति में सक्रिय शोध में जुटे हुए हैं। शिक्षा खासकर तकनीकी शिक्षा आपकी अभरूचि के क्षेत्र हैं। आपका इस दिशा में विशिष्ट योगदान है।  आप कई संस्थानों के अध्ययन में रह चुके हैं तथा उन संस्थानों के पाठ्यक्रम निर्माण में अपना योगदान दे चुके हैं। आपने प्रतिष्ठित राष्ट्रीय परियोजनाओं के माध्यम से तकनीकी विकास में विशिष्ट योगदान दिया है। भारत द्वारा विकसित प्रथम टॉरपीडो हेतु सोनार होमिंग सिस्टम का डिजाइन, डिफेंस सिस्टम हेतु कम्यूनिकेशन सिस्टम्स का डिजाइन तथा डीआरडीओ द्वारा विकसित कॉग्निटिव रेडियो के विकास के प्रथम चरण में इनका महत्वपूर्ण योगदान समेत इन्होंने कई योगदान दिए हैं। विज्ञान एवं तकनीकी विभाग, भारत सरकार की ओर से वर्ष 1987 में बॉयज-कास्ट शोध अनुदान, वर्ष 2007 में आईएसटीई द्वारा बड़ौदा चैप्टर राष्ट्रीय पुरस्कार तथा वर्ष 1984 में आईईईई क्षेत्र में 10 (एशिया एवं प्रशांत) स्नातक शोध पत्र प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ छात्र पुरस्कार समेत कई पुरस्कार इन्होंने प्राप्त किया है। आप माननीय राष्ट्रपति के साथ दिनांक 24-27 मई, 2016 के दौरान चीन की राजकीय दौरे पर जाने वाले प्रतिष्ठित अकादमिक शिष्ट मंडल के सक्रिय सदस्य भी रह चुके हैं। आप कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के आयोजन के सूत्रधार रहे हैं तथा कई समितियों को आप जेनरल चेयर, टीपीसी चेयर कर चुके हैं।