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पृथ्वी, महासागर एवं जलवायु विज्ञान विद्यापीठ

चिरस्थाई विकास के लिए पृथ्वी-महासागर-वायुमंडलीय अंतरप्रक्रिया प्रणाली के एकीकृत व्यवस्थित दृश्य द्वारा पृथ्वी प्रणाली विज्ञान में आधुनिक शिक्षा के विकास हेतु बौद्धिक, सौहार्दपूर्ण तथा जोशपूर्ण वातावरण प्रदान करना।
 
पृथ्वी एक समष्टि एवं गत्यात्मक प्रणाली है। इसके कार्य को समझने और मूल्यांकन करने के साथ यह जानना भी अतिआवश्यक है कि इसकी गतिशीलता का ज्ञान केवल महत्वपूर्ण ही नहीं है बल्कि चिरस्थाई जीवन के लिए भी आवश्यक है। भू-वैज्ञानिक, वायुमंडलीय वैज्ञानिक एवं समुद्रविज्ञानी के कंधों पर वर्तमान मौसम की संकटावस्था के कारण ग्रह का निर्देशन करना एक चुनौतीपूर्ण दायित्व है।
 
भा.प्रौ.सं.भुवनेश्‍वर में पृथ्वी, महासागर एवं जलवायु विज्ञान की स्थापना उपर्युक्‍त मुद्दों पर विचार करने के साथ हुई है। प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा, उष्णकटिबंधीय तूफान एवं चक्रवात से अधोमुख है। यह क्षेत्र प्रचुर मात्रा में खनन परिचालन तथा कोयला दहन, तटवर्ती क्षरण, वायुशिफ अवक्षय के कारण भारी मात्रा में प्रदूषण की समस्याओं से ग्रस्त है। प्रसिद्ध चिल्का झील एवं जैव-आरक्षित क्षेत्र जैसे सिमिलीपाल आदि भी गंभीर खतरों से ग्रस्त हैं। यद्यपि ये स्थानीय एवं क्षेत्रीय समस्याएं लगती हैं किन्तु इनके दूरगामी वैश्विक परिणाम भी हो सकते हैं।
 
विद्यापीठ का लक्ष्य है कि ऐसे प्रशिक्षित, शिक्षित एवं मानव संसाधन तैयार किए जाएं जो जल एवं वायु का संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा का विकास, हाइड्रोकार्बन, आपदा भविष्यवाणी तथा तत्परता, जलविभाजक एवं बाढ़ प्रबंधन, तटवर्ती क्षरण, पर्यावरण प्रदूषण मूल्यांकन, संसाधन संरक्षण, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों का विकास, मौसम परिवर्तन भविष्यवाणी एवं सामाजिक-आर्थिक कल्याण पर प्रभाव जैसे विभिन्न समस्याओं का समाधान कर सकें।
 
विद्यापीठ डॉक्टरल अनुसंधान के अतिरिक्‍त अवर स्‍नातक एवं स्‍नातकोत्तर स्तर की उपाधि प्रदान करता है। यह प्रस्तावित पाठ्यक्रम छात्रों को पृथ्वी प्रणाली विज्ञान के हर क्षेत्र में अनुसंधान कार्यों को करने के अलावा पृथ्वी, महासागर एवं जलवायु विज्ञान के आधारभूत एवं अनुप्रयुक्‍त दोनों ही पहलुओं पर आधुनिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु तैयार किया गया है। 
 
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