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खनिज, धातुकर्म एवं पदार्थ अभियांत्रिकी विद्यापीठ

वर्ष 2012 में भा.प्रौ.सं.भुवनेश्वर में स्थापित खनिज, धातुकर्म एवं पदार्थ अभियांत्रिकी विद्यापीठ एक अनूठी पहल है जहाँ खनिज, धातु, एवं पदार्थ स्थानीय लोगों के लिए प्रसांगिक एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लक्ष्य के साथ सहयोगात्मक रूप से अस्तित्व में आया है। भारत के सबसे खनिज समृद्ध राज्यों में से एक, ओडिशा में स्थित होने के कारण ,विद्यापीठ को इस तथ्य की जानकारी है कि प्रसंस्करण प्रक्रिया के माध्यम से ही खनिज से अधिक आर्थिक लाभ लिया जा सकता है जहाँ पर भूगर्भ स्थित खनिज आर्थिक रूप से व्यावसायिक उत्पाद में स्थानांतरित किया जाता है जो समाज के उत्थान के लिए प्रधान होता है। विद्यापीठ खनिज, धातु एवं पदार्थ के विभिन्न पृष्ठभूमि वाले संकाय सदस्यों के साथ इस लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु प्रयास कर रहा है।
 
वर्तमान में, विद्यापीठ क्रियाकलाप बहु-दिशात्मक है तथा अनुसंधान एवं शिक्षण दोनों ही कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। अपने प्रारंभिक काल से ही विद्यापीठ ने साझेदारी के माध्यम से प्रगति का मार्ग अपनाया है। इस दिशा में किए गए कार्य है : खनिज एवं पदार्थ प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएमएमटी) भुवनेश्वर के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया जिससे विशेष आंतरिक संसाधनों द्वारा अनुसंधान एवं विकास कार्य को बढ़ावा मिले। ख) वार्विक मैनुफैक्चरिंग ग्रुप (डबल्यूएमजी) वार्विक विश्वविद्यालय, यूके के साथ सहयोग स्थापित किया गया। ग) स्थाई पीठ प्रोफेसरशिप को स्थापित करने के लिए एमजीएम ग्रुप (ओडिशा की खनन एवं स्टील की अग्रणी कंपनी) से 30 मिलियन की दान स्वरूप अक्षय निधि प्राप्त हुई है। यूरोप एवं यूएसए विश्वविद्यालयों के साथ सहयोगात्मक अनुसंधान एवं शिक्षण को स्थापित करने का कार्य प्रयासरत है। विद्यापीठ ने अगस्त 2012 से देश के हर कोने से आए छात्रों को लेकर पदार्थ विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में प्रथम निष्णात पाठ्यक्रम प्रारंभ किया। वर्तमान में, एसएमएमएमई टीम वर्ष 2013 तक खनिज, धातु एवं पदार्थ में जोशपूर्ण अनुसंधान सुविधा की स्थापना पर ध्यानकेंद्रित कर रही है और शीघ्र ही अवर स्‍नातक पाठ्यक्रम प्रारंभ करेंगी।   
 
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