दृष्टिकोण एवं ध्येय

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भुवनेश्वर 22 जुलाई 2008 को आईआईटी के ब्रांड नाम के साथ स्थापित हुआ। यह तथ्य इस बात का साक्षी है कि संस्थान न केवल अपने विरासत में मिले नाम की योग्यता को सिद्ध करता है बल्कि विलक्षण के मार्ग पर स्वतः को विशिष्ट एवं प्रतिष्ठित करता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भुवनेश्वर के दृष्टिकोण, ध्यय, लक्ष्य एवं लक्ष्यप्राप्ति की रणनीतियाँ तथा मूल आदर्श इस प्रकार प्रस्तुत हैं -

दृष्टिकोण

“हम अपने विशिष्ट ज्ञान के कारण विश्व के अति सम्मानित संस्थान होंगे।”

 ध्येय

1. हमें स्वयं को शिक्षण समुदाय के ऐसे रूप में ढालना है जहाँ पर हम एक दूसरे के साथ मिलकर कार्य कर सकें, एक दूसरे की बात को समझ सकें और एक दूसरे का सम्मान कर सकें।
2. विषय की सीमा को पार करते हुए संकाय सदस्यों, शोधार्थियों एवं छात्रों को एक जुट होकर कार्य करने की प्रेरणा देना और सुविधा प्रदान कराना।
3. छात्रों में नवाचार एवं आविष्कार, अभिकल्प एवं सृजन एवं उद्यमशीलता के प्रति उत्साह भरना। 
4. सृजनात्मक एवं संज्ञानात्मक पर जोर देते हुए ऐसे पाठ्यक्रमों का विकास एवं अध्ययन करना, जो समग्र रूप से तैयार हो, गतिशील और लचीले हों। 
5.संस्थानऔरउद्योगकेबीचलाभदायकसाझेदारीकेलिएप्रयासकरना।

 लक्ष्य एवं रणनीतियाँ

1.   वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धात्मक शैक्षणिक पाठ्यक्रमों एवं वातावरण को प्रोत्साहित करना जो बौद्धिक विकास एवं कौशल अधिग्रहण में सहायता प्रदान करें।

  • गंभीर विश्लेषण की कुशलता एवं प्रभावी समन्वयन की सक्षमता को बढ़ावा देना तथा पाठ्यक्रम विकास एवं वितरण में नए ज्ञान का प्रयोग करना।
  • क्षेत्र, राज्य एवं राष्ट्र एवं विश्व में शिक्षण प्रक्रिया की बदलती आवश्यकताओं की पूर्ति करना।
  • परिसर में विविधतापूर्ण, पूर्ण कार्यशील, शिक्षण केंद्रित पर्यावरण बनाना।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षुता, औद्योगिक परियोजना विकल्प, छात्र विनिमय एवं विदेश अध्ययन सहभागिता की सुविधाओं द्वारा छात्रों की राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मक की क्षमता को सुदृढ़ करना।
  • आविष्कारी विज्ञान एवं समाधान विज्ञान पर समान रूप से जोर देना।
  • शिक्षण कक्ष में अनुसंधान कार्य को बढ़ावा देना।

2.   विश्‍व स्तर के अंतरविषयक अनुसंधान कार्य एवं विद्वतापूर्ण के प्रयासों का विस्तारण

  • विशिष्ट अनुसंधान कार्यक्रमों को बढ़ावा देना जो वास्तविक जीवन एवं भविष्य में घटित होने वाली समस्याओं का समाधान कर सकें।
  • विभिन्न स्कूलों के अंदर तथा बाहर एकीकृत एवं समन्वित अंतरविषयक अनुसंधान कार्य को सुदृढ़ करना।
  • अर्थजगत के सभी क्षेत्रों के साझेदारों के साथ सम्मिलित होते हुए संस्थान के अनुसंधान आधार एवं समर्थित आधारिक सरंचना को व्यापक और सृदृढ़ बनाना।
  • विश्व स्तर के श्रेष्ठ संकाय सदस्यों, पोस्ट डॉक्टरल फैलो, डॉक्टरल एवं स्नातकोत्तर छात्रों के बुद्धिजीवी समूह का सृजन करना।
  • उत्कृष्ट सहायक स्टॉफ को तैयार करना और उनकी दक्षताओं का निरंतर उन्नयन करना।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा के आधार पर बौद्धिक संपदा एवं प्रतिमानों के संग्राहक के रूप में स्वयं को विकसित करना।

3. प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग के माध्यम से जीवन की गुणवत्ताओं में सुधार से स्वस्थ समाज का सुदृढ़ निर्माण करना और सहयोग प्रदान करना।

  • समुदाय भागीदारी एवं सामाजिक उद्यम के प्रोत्साहन हेतु संस्थागत संरचना की स्थापना करना।
  • संस्थान के विकासपरक दिशा निर्देशों में समुदाय भागीदारी को सम्मिलित करना।
  • समुदाय के विकास के लिए संकाय सदस्यों एवं छात्रों के प्रयासों को प्रोत्साहित एवं पुरस्कृत करना। उनके प्रयासों एवं उपलब्धियों को मौखिक एवं लिखित रूप से सम्मानित करना है।

4.   संस्थान के लिए ठोस एवं चिरस्थायी आर्थिक आधार की स्थापना।

  • मजबूत आर्थिक-स्थिति हेतु प्रायोजित परियोजना, परामर्श एवं प्रौद्योगिकी अंतरण को प्रोत्साहित करना।
  • प्रायोजित पीठों एवं छात्रवृत्तियों के लिए प्रतिभाओं को आकर्षित करने हेतु ब्रांड मूल्य का समुचित प्रयोग करना।
  • उद्यमशील प्रयासों विशेषतया सार्वजनिक निजी भागीदारी के माध्यम से संस्थान प्रयोगशाला में विकसित उभरती हुई प्रौद्योगिकियों का विपणन में सहायता प्रदान करना।

5.   स्वस्थ एवं सुदृढ़ संबंधों से परिपूर्ण भा.प्रौ.सं.भुवनेश्वहर परिवार का निर्माण करना।

  • सकारात्मक कार्य प्रणाली को अपनाना एवं प्रोत्साहित करना तथा उन्नत सेवा गुणवत्ता बनाए रखना।
  • व्यावसायिक विकास के अवसरों को बढ़ाते हुए कर्मचारी सहयोग में सुधार लाना।
  • संस्थान और सम्मिलित सामाजिक दायित्वों को सच्ची निष्ठा के साथ निभाना।
  • जोशपूर्ण एवं पाठ्यतेर गतिविधियों को पोषित करना एवं बनाए रखना।
  • निष्पक्षता, विश्वास तथा आपसी सम्मान के माध्यम से अच्छे संबंध हेतु एक परिवेश का सृजन करना।

मूल आदर्श

1. नवाचार और आविष्कार के पथानुगामी उदीयमान् इंजीनियरों एवं वैज्ञानिकों के रूप में छात्रों का सम्मान करना। 
2. विचारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को पोषित करना तथा जिज्ञासा की भावना को प्रोत्साहित करना। 
3. हर व्यक्ति की संपूर्ण सामर्थ्य को विकसित करने के लिए अवसर प्रदान करना। 
4. दूसरों के विचारों तथा अधिकारों का सम्मान करना।